Apshisht Jal ki Kahani Class 7 Notes in Hindi : यह नोट्स Class 7 Science NCERT New Book के लेटेस्ट पैटर्न के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे हमारे Expert के द्वारा तैयार किया गया है। यह नोट्स Latest 2027 के पैटर्न पर आधारित है।

Chapter 13 अपशिष्ट जल की कहानी
झाग से भरपूर तेल मिश्रित काले भूरे रंग का जल, जो बर्तन धोने की जगह, शौचालय, दुकान, होटल आदि से नालियों में जाता है वह ‘अपशिष्ट जल‘ कहलाता है।
2005-15 तक को संयुक्त राष्ट्र संघ ने जीवन के लिए जल पर कार्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक के रूप में घोषित किया है।
पीनेयोग्य जल को पेयजल कहते हैं।
वर्तमाल समय में लगभग 90 प्रतिशत सतही जल दूषित हो गया है।
अपशिष्ट जल में रोग वाहक जीवाणु और सुक्ष्मजीव होते हैं।
विश्व के 40 प्रतिशत लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है।
22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है।
वाहित मलजल में घूले हुए और निलंबित अपद्रव्यों को संदूषक कहते हैं।
जल के दूषित होने के मुख्य कारण
- घरेलू मलजल
- उद्योगों-कारखानों से निकलने वाला कचरा
- खेतों में उपयोग होने वाला कीटनाशक एवं उर्वरक
दूषित जल से होने वाला हानि
- दूषित जल पीने से पीलिया, पोलियो, डेंगू, हैजा, टायफाइड, पेचिस, मस्तिष्क ज्वर आदि रोग होते हैं।
- शीशायुक्त जल के सेवन से पागलपन, मस्तिष्क तथा किडनी संबंधित बिमारी होती है।
- पारायुक्त जल में रहनेवाली मछली के सेवन से मिनीमाता नामक बिमारी होती है।
- आर्सेनिक-युक्त जल के सेवन से चर्मरोग तथा कैंसर रोग होता है।
अपशिष्ट जल को जलस्त्रोतों में जाने से पहले उसका उपचार करना आवश्यक है ताकि नदियों या अन्य स्त्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
- किसका उपयोग जल को शुद्ध करने में किया जाता है? A. क्लोरीन गैस (जल में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को मारने के लिए)