Class 7 Science Ushma Notes – ऊष्मा

NCERT Class 7 Science Ushma Note in Hindi : यह नोट्स Class 7 Science NCERT New Book के लेटेस्‍ट पैटर्न के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे हमारे Expert के द्वारा तैयार किया गया है। यह नोट्स Latest 2027 के पैटर्न पर आधारित है।

Class 7 Science Ushma Notes

Chapter 3 ऊष्मा

ऊष्‍मा एक प्रकार की ऊर्जा है।

ताप- ताप यह बताता है‍ कि कोई वस्‍तु कितनी गर्म या कितनी ठंडी है।

ऊष्‍मा और ताप में अंतर

  1. ऊष्‍मा एक प्रकार की ऊर्जा है जबकि ताप किसी वस्‍तु की ऊष्‍मीय अवस्‍था है।
  2. किसी वस्‍तु को ऊष्‍मा देने से उस वस्‍तु का ताप बढ़ता है जबकि किसी वस्‍तु से ऊष्‍मा निकाल लेने से उस वस्‍तु का ताप घटता है।
  3. ताप यह बताता है कि एक वस्‍तु को दूसरी वस्‍तु के संपर्क में लाने पर ऊष्‍मा पहली वस्‍तु से दूसरी वस्‍तु में जाएगी अथवा दूसरी वस्‍तु से पहली वस्‍तु में।

ताप-मापन

  • ताप मापने के लिए जिस युक्ति का उपयोग किया जाता है, उसे थर्मामीटर या तापमापी से करते हैं।
  • जिस तापमापी से हम अपने शरीर के ताप को मापते हैं उसे डॉक्‍टरी थर्मामीटर कहते हैं।
  • हमारे शरीर का औसत तापमान 98.4 फारेनहाइट या 37C होता है।
  • डॉक्‍टरी थर्मामीटर से 35C से 42C तक के ही ताप माप सकते हैं।
  • प्रयोगशाला तापमापी का परिसर -10C से 110C होता है।

ऊष्‍मीय प्रसार

जब किसी वस्‍तु में ऊष्‍मा दिया जाता है तो उसका आकार बढ़ जाता है। इस क्रिया को ऊष्‍मीय प्रसार कहते है।

ऊष्‍मा का स्‍थानांतरण- जब ऊष्‍मा एक वस्‍तु से दूसरे वस्‍तु में या किसी वस्‍तु के एक भाग से दूसरे भाग में जाती है तो इस क्रिया को ऊष्‍मा का स्थानांतरण कहा जाता है।

प्रकृति में ऊष्‍मा का स्थानांतरण तीन विधियों से होता है—

  • चालन
  • संवहन
  • विकिरण
  1. चालन— जब किसी वस्‍तु के एक सिरे से दूसरे सिरे में ऊष्‍मा का स्‍थानांतरण होता है, तो उसे चालन कहते हैं। जैसे- चम्मच का गर्म होना।
  • ठोस पदार्थों में ऊष्‍मा का स्‍थानांतरण चालन विधि से होता है।

२. संवहन— ऊष्‍मा स्‍थानांतरण की वह विधि जिसके द्वारा ठोस या गैस के अणु या कण स्‍वयं उस पदार्थ के गर्म भाग से ठंडे भाग की ओर चलकर ऊष्‍मा को उस पदार्थ के दूसरे भाग तक पहुँचाते हैं।

  • द्रव और गैस संवहन विधि से गर्म होते हैं।

३. विकिरण- ऊष्‍मा स्‍थानांतरण की वह विधि जिसमें ऊष्‍मा बिना माध्‍यम को प्रभावित करे (बिना गर्म करे) एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक पहुँचती है।

  • इसमें माध्‍यम की आवश्‍यकता नहीं होती है। सूर्य से ऊष्‍मा विकिरण विधि से प्राप्‍त होती है।

समीर— जब हवा की चाल बहुत कम हो तो उसे समीर कहते हैं।

  • जब हवा समुद्र से स्‍थल की ओर जाए, तो उसे समुद्री समीर कहते हैं। यह दिन के समय में चलते हैं।
  • जब हवा की दिशा स्‍थल से समुद्र की ओर हो तो उसे स्‍थल समीर कहते हैं। यह रात के समय चलते हैं।
  • दिन के समय स्‍थल जल की अपेक्षा जल्‍दी गर्म होता होता है।
  • हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, जिसे भरने के लिए समुद्र की ओर से ठंडी हवा स्‍थल की आरे बहती है। जिसे समुद्री समीर कहा जाता है।
  • रात में समुद्र का जल, स्‍थल की अपेक्षा धीमी गति से ठंडा होता है। इसलिए, स्‍थल की ओर से ठंडी हवा समुद्र की ओर बहती है। जिसे स्‍थल समीर कहते हैं।

सर्दियों में ऊनी वस्‍त्र हमें उष्‍ण बनाए रखते हैं

ऊन ऊष्‍मा-रोधी होती है। इसके अलावा, ऊन के रेशों के बीच में वायु फंसी (ट्रैप) रहती है। यह वायु हमारे शरीर की ऊष्‍मा को ठंडे परिवेश की ओर विकिरित होने से रोकती है। जिससे हमें उष्‍णता का अनुभव होता है।

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